सीताराम सेकसरिया (1892-1982)
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| सीताराम सेकसरिया (1892-1982) |
डायरी का एक पन्ना
26 जनवरी आज का दिन तो अमर दिन है। आज के ही दिन मारे हिंदुस्तान में
और इस वर्ष भी उसको पुनरावृत्ति थी जिसके लिए काफी तैयारियों पहले से की गई थीं। अपन
वर्ष हिस्सा बहुत
था। इस वर्ष अपने सकते थे दिया था। केवल प्रचार में दो हजार रुपया खर्च किया गया था कम
अपने समझते थे अपने ऊपर है, और इसी तरह जो कार्यकर्ता थे उनके घर जाकर
प्रायः मकानों पर राष्ट्रीय झंडा फहरा रहा था और कई मकान तो ऐसे सजाए गए थे कि ऐसक
मिल गई हो। कलकत्ते के प्रत्येक भाग में ही झंडे लगाए गए थे। जिस रास्ते से मनुष्य जाते थे उसी रास्ते में
और नवीनता मालूम होती थी। लोगों का कहना था कि ऐसी सजावट पहले नहीं हुई। पुलिस भी अपनी पूरी
शहर में गश्त देकर प्रदर्शन कर रही थी। मोटर लारियों में गोरखे तथा सारजे प्रत्येक मोड़ पर थे। कितनी ही
शहर में घुमाई जा रही थीं। घुड़सवारों का प्रबंध था। कहीं भी ट्रैफिक पुलिस नहीं थी सारी पुलिस को इसी काम
या गया था। बड़े-बड़े पाकों तथा मैदानों को पुलिस ने सवेरे से ही घेर लिया था।
व्याख्यालेखक के अनुसार 26 जनवरी 1931 का दिन भूलने योग्य नहीं है। एक साल पहले इसी दिन दिवस गया था। कलकत्ता में इसकी अच्छी तैयारियों की गई थी। मेंही परराष्ट्रीय झंडा फहरा रहा था। कई मकान ऐसे क । पूरे शहर में गश्त कर रही थी। वह कहीं भी भीड़ एक

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